मथुरा । फरह क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय गढ़ाया लतीफपुर में सहायक अध्यापिका पूनम पाराशर पर कुछ दिन पहले छात्रा को पढ़ाने से मना करने, मारपीट करने और अभिभावकों से दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत सामने आने के बाद गांव में मामला चर्चा का विषय बन गया था। आरोपों को ग्रामीणों ने पूरी तरह निराधार बताया है। गांव के कई लोगों ने सक्षम अधिकारी को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर अध्यापिका के व्यवहार, शिक्षण कार्य और बच्चों के प्रति उनके समान व्यवहार की सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि पूनम पाराशर द्वारा विद्यालय में सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा दी जाती है और आज तक किसी भी छात्र अथवा अभिभावक ने उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं की।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि गांव की महिला प्रियंका पत्नी उमेश कुमार द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। ज्ञापन के अनुसार, यह शिकायत विद्यालय स्टाफ के बहकावे और निजी द्वेष के चलते की गई है। गांव के लोगों ने कहा कि अध्यापिका का स्वभाव शांत एवं सहयोगात्मक है तथा वे बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने और शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती हैं। ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि पूनम पाराशर ने कभी किसी बच्चे या अभिभावक के साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग नहीं किया।
मामले में गांव के करीब 15 से 16 लोगों ने शपथपत्र (एफिडेविट) देकर अध्यापिका के पक्ष में बयान दर्ज कराए हैं। सभी ने आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताते हुए सक्षम अधिकारी से शिकायत को निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अध्यापिका की कार्यशैली और विद्यालय में बढ़ती सक्रियता से कुछ लोग नाराज हैं, जिसके चलते यह विवाद खड़ा किया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि झूठी शिकायत को निरस्त कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि एक शिक्षिका की छवि को बेवजह खराब न किया जा सके। वहीं गांव में अब अध्यापिका के समर्थन में लोग खुलकर सामने आ रहे हैं।














