नई दिल्ली। हैदराबाद विश्वविद्यालय और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाद अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय विवाद के केंद्र में है। इसको लेकर विवाद आज बढ़ गया जब आठ विपक्षी पार्टियों ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर निशाना साधते हुए विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष को प्रताडि़त करने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरानी पर एबीवीपी के ‘संरक्षक संतÓ की तरह कार्य करने का आरोप लगाया।कांग्रेस, वाम दलों और आप समेत अन्य पार्टियों ने एक संयुक्त वक्तव्य में कहा, ”हम इस तथ्य को लेकर व्यथित हैं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की पहली महिला अध्यक्ष एवं पीएचडी छात्रा रिचा सिंह को प्रशासन प्रताडि़त कर रहा है।ÓÓ भाकपा के महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने अलग से भाजपा-आरएसएस से इलाहाबाद विश्वविद्यालय से दूर रहने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की छात्र शाखा एबीवीपी जेएनयू और एचसीयू को निशाना बनाने के बाद इसका भगवाकरण करने का प्रयास कर रही है और जो लोग परिसर में तनाव पैदा कर रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जद :यू: के के सी त्यागी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के स्वेच्छाचारी रवैए का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रिचा सिंह ने सभी सांसदों को उस मुद्दे और लैंगिक असंवेदनशीलता के मुद्दे पर पत्र लिखा है। उन्होंने कहा, ”पहले हमने रोहित का बलिदान देखा, उसके बाद कन्हैया प्रकरण और अब रिचा सिंह प्रकरण प्रक्रिया में है।ÓÓ हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित शोधार्थी रोहित वेमुला की आत्महत्या और कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी से संंबंधित जेएनयू विवाद के बीच तुलना करते हुए आठ पार्टियों के नेताओं ने एक संयुक्त वक्तव्य में ईरानी पर निशाना साधा और उन्हें याद दिलाया कि वह पूरे देश की मंत्री हैं, न कि सिर्फ आरएसएस और भाजपा की। जयराम रमेश और राजीव शुक्ला :कांग्रेस:, सीताराम एचुरी :माकपा:, डी राजा :भाकपा:, के सी त्यागी :जद-यू:, जावेद अली खान :सपा:, तिरूचि शिवा :द्रमुक:, भगवंत मान :आप: और जय प्रकाश यादव :राजद: बयान पर हस्ताक्षरकर्ता हैं। उन्होंने कहा, ”शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता लोकतंत्र की आधारशिला है, इस बात को समझने से इंकार करने वाली सरकार परिसरों में एबीवीपी की गुंडागर्दी का ढिठाई से समर्थन करके व्यापक असंतोष का बीज बो रही हैं।ÓÓ














