नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश वीरेन्द्र सिंह की लोकायुक्त पद पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई स्थगित करने का उप्र सरकार का आग्रह ठुकरा दिया। राज्य सरकार का कहना था कि सुनवाई स्थगित कर दी जाए क्योंकि उसके वकील कपिल सिब्बल उपलब्ध नहीं है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि राज्य को एक सीमा से आगे यह सुविधा नहीं दी जा सकती।
जस्टिस रंजन गोगोई और प्रफुल्ल चंद्र पंत की पीठ ने मंगलवार को राज्य सरकार से कहा, वह किसी अन्य वकील की व्यवस्था करे। हम किसी वकील के साथ एक सीमा तक सहयोग कर सकते हैं परंतु न्यायालय को भी काम करना है। वैकल्पिक व्यवस्था कीजिए। इसे कल सूचीबद्ध किया जाए।
उप्र सरकार के वकील एमआर शमशाद ने सिबल के उपलब्ध नहीं होने के आधार पर मामले की सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित करने का आग्रह किया था। कपिल सिबल अरुणाचल प्रदेश के राजनीतिक संकट से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रही पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष व्यस्त हैं। सुनवाई में प्रदेश के एडवोकेट जनरल विजय बहादुर सिंह मौजूद थे लेकिन वह चुप रहे।
पीठ ने कहा कि कोर्ट के लिए वकील की सुविधा महत्वपूर्ण होती है परंतु एक सीमा के आगे उन्हें एडजस्ट नहीं किया जा सकता। हम सिब्बल के लिए इंतजार नहीं कर सकते। न्यायालय ने राज्य सरकार से कहा कि वह बुधवार को सुनवाईके लिए तैयार रहे।
मामला सुबह सुनवाई के आया था लेकिन यूपी के वकीलों ने कहा कि सिबल वयस्त हैं इसलिए मामले को स्थागित किया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि सिब्बल से कहें कि वह इसके लिए कुछ अपने समय में से समय निचोड़े और दो बजे पेश हों। लेकिन दो बजे फिर वही स्थिति रही तो कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार दूसरे वकील का इंतजाम करे।
इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश अध्यक्षता वाली पीठ ने नई याचिका, जिसमें राज्य सरकार द्वारा छल किए जाने का आरोप लगाया गया है, जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के पास भेज दी थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार का यह झूठ था कि जस्टिस सिंह के नाम पर मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष की सहमति थी जबकि मुख्य न्यायाधीश ने उस पर कोई सहमति नहीं दी है।
लेकिन बाद में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ ने सीजेआई से मिलकर उन्हें बताया कि उन्होंने जस्टिस सिंह के खिलाफ अपनी टिप्पणियां की थी जिसे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को नहीं बताया। इसके बाद यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई। मामला कोर्ट में आने पर सरकार ने जस्टिस सिंह को कार्यभार ग्रहण करने रोका हुआ है।














